सोमवार, अगस्त 2, 2021
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Operating System क्या है और इनके प्रकार ?

Operating System क्या है और ये किस-किस Type के होते है? इसकी जानकारी आज के Time में हर किसी को होना बहुत ही जरुरी है। क्या आपको इसका जवाब पता है ? अगर नहीं तो कोई बात नहीं आज हम इसी विषय को समझेंगे।

Operating System क्या है ?

Operating System एक System Software है ,यह साफ्टवेयर का collection है जो कि मिलने वाली instruction को कण्ट्रोल करता है ।यह हार्डवेयर एवं साफ्टवेयर के बीच एक पुल का काम करता है और साथ ही साथ हार्डवेयर के usage को control करता है।

continue to OS…

इस बारे में हम और अधिक कुछ जाने Operating System क्या है ? उससे पहले हम software को समझते है।

तो सबसे पहले ये समझते है की सॉफ्टवेयर क्या होते है और ये कितने type के होते है ? चलिए पहले इसे जान लेते है ।

Software क्या है ?

सॉफ्टवेयर एक बहुत सारे program files का एक collection होता है , और program बहुत सारी command का collection होता है,

ये command programming language (C,C++,Java etc) या machine language में दी जाती है।

Software दो type के होते है :-

  1. Application Software
  2. System Software

1. Application Software

Application Software वो software होते है जिन्हे Run होने के लिए दूसरे Software/Platform (Windows , Android etc ) की जरूरत पड़ती है। ये दूसरे Software पर निर्भर होते है।

जैसे :- VLC , MX Player , Games , MS Office etc
ये सभी सॉफ्टवेयर को run होने के लिए Operating System की जरूरत पड़ती है ये सीधे तोर पे Hardware पे रन नहीं हो सकते है।

तो हम कह सकते है की ऐसे सभी सॉफ्टवेयर जो डायरेक्ट Hardware पर नहीं run हो सकते, जिनको रन होने के लिए किसी दूसरे सॉफ्टवेयर की जरूरत पड़ती है उसे Application Software कहते है।

2. System Software

System Software वो software होते है जिन्हे Run होने के लिए दूसरे Software/Platform की जरूरत नहीं पड़ती है, ये पूरी तरह से आत्मनिर्भर होते है।

जैसे : Operating System (Windows, IOS, Android, Linux Etc), ROM, BIOS इत्यादि।

ये सॉफ्टवेयर Direct हार्डवेयर पर रन होते है Application सॉफ्टवेयर को Platform Provide करते है।

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Operating System

Operating System जो की एक System Software है , उसे हम Resource Manager के नाम से भी जानते है।

दरअसल,जब भी हम OS पे कोई भी काम करते है तो उसको करने के लिए जितने भी सॉफ्टवेयर, ड्राइवर्स और हार्डवेयर की जरूरत पड़ती है उन सबको Provide कराने और साथ ही उनको Manage करने का काम OS करता है।

चलिए इसको कुछ उदहारण से समझने की कोसिस करते है :-

मान लीजिये आप कंप्यूटर या फ़ोन में म्यूजिक सुनते है , तो अब म्यूजिक को चलने के लिए जो प्लेटफार्म की जरूरत पड़ती है वो, जिन ड्राइवर्स की जरूरत पड़ती है वो और साथ ही म्यूजिक सुनने के लिए Speaker को use में लाने का ऑपरेटिंग सिस्टम करता है।

और साथ ही वो इस बात का भी ध्यान रखता है की जिस हार्डवेयर की डिमांड है केवल वही हार्डवेयर उसे में आये। जैसे इस उदहारण में हमने स्पीकर को लिए है।

एक और उदहारण से समझने की कोशिस करते है , मान लीजिए की आप कंप्यूटर से Print कमांड देते है , तो ऐसे में प्रिंट के लिए प्रिंटर ही Working में आये कोई और हार्डवेयर नहीं। इस बात का ध्यान रखना भी OS का काम है।

Operating system क्या है ?

सोचो कैसा हो की आप प्रिंट कमांड दो और गाने चलने सुरु हो जाए । अगर आप में से कभी किसी के साथ ऐसा हुआ हो तो अपना Experience जरूर शेयर करे।

कुछ प्रशिद्ध Operating System के नाम जिनके बारे में आप सभी ने सुना होगा

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ये कुछ ऐसे OS है जिसके बारे में आपने कभी ना कभी जरूर सुना होगा।

Operating System के काम

वैसे तो Operating System Device के On होने से लेकर Off होने तक हज़ारो कार्य करता है परन्तु हम उसके कुछ महत्वपूर्ण कार्यो की बात करेंगे।

जिसके आधार पर Operating System की परिभासा तय होती है।

  1. Memory Management
  2. CPU Management
  3. Device Management
  4. File Management
  5. Security Management

ये कुछ ऐसे Basic कार्य है जिसको हर Operating System करता है।

Memory Management

यहाँ OS का कार्य है Primary और Secondary मेमोरी को मैनेज करना।

यहां Primary और Secondary मेमोरी से मतलब Temporary और permanent मेमोरी से है।
Primary Memory : ROM, RAM, Cache
Secondary Memory: Hard Disk , Pen drive

  • किसी भी सॉफ्टवेयर को Run होने के लिए RAM की जरूरत होती है फिर चाहे वो खुद ऑपरेटिंग सिस्टम हो या कोई भी एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर।
    उन सभी के लिए RAM को उपलब्ध करना और ये तय करना की कोन कितनी RAM use करेगा, OS का कार्य है।
  • ऑपरेटिंग सिस्टम का कार्य यह सुनिस्चित करना भी होता है, की सॉफ्टवेयर की files Secondary memory में कहा कहा स्टोर होंगी।
  • जब कई सारे सॉफ्टवेयर या Program एक साथ Run होते है तब ऐसे में ये तय करना की किसको कितनी RAM देनी है ये भी OS का कार्य है।
  • जब किसी सॉफ्टवेयर या Program का कार्य समाप्त हो जाए तो उसके तुरंत बाद मेमोरी को free करके उसे दूसरे सॉफ्टवेयर के लिए उपलब्ध करना भी OS का काम है।

CPU Management

  • ऑपरेटिंग सिस्टम का कार्य ये सुनिचित करना भी होता है की CPU, जब System on हो तब, कभी भी Ideal Stage में ना जाए।
    यहां Ideal stage से मतलब है कभी भी CPU खाली न हो । क्युकी अगर CPU खाली हुआ तो एक task खतम होने के बाद दूसरे task को perform करने में अधिक समय लगेगा और ऐसे में CPU की Life कम होगी।
  • जब बहुत सरे कार्य एक साथ किए जारहे हो तब CPU की time sharing करना भी OS का कार्य है।

Device Management

सभी Input और Output devices को कण्ट्रोल करने के साथ साथ Internal Device को manage करने का काम OS का होता है।

उद्धरण के लिए , मान लीजिये आपने कंप्यूटर से प्रिंट कमांड (Ctrl + P) दी।

अब ऐसे में आपने input के लिए Keyboard का इस्तेमाल किआ वही Output के लिए प्रिंटर का, तो इसी input व output को मैनेज करने का काम भी OS का है।

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यहा पे एक बात ध्यान रखना है की Operating System हर डिवाइस को मैनेज करता है।
example : Monitor, Keyboard, mouse, DVD-ROM, etc

यानि की हर connected डिवाइस को मैनेज करता है।

File Management

दोस्तों file Management के बारे में कुछ समझे उससे पहले आपको एक बात समझनी होगी, Hard Disk में डाटा स्टोर करने के लिए सेक्टर बने हुए होते है।
तो ऐसे में OS कैसे फाइल management करता है चलिए जानते है।

ऑपरेटिंग सिस्टम फाइल की priority तय करके ये फैसला करता है कोनसी फाइल कहा स्टोर होगी , जैसे अगर फाइल सॉफ्टवेयर की है तो वो Primary सेकटर में जाएगी ताकि उसे एक्सेस करना आसान हो सके और अगर फाइल यूजर द्वारा बनाई गयी है तो उसे Secondary सेक्टर में स्टोर किआ जाएगा।

Security Management

यहाँ security से सीधा मतलब Unauthorized access को तो रोकना है ही पर साथी की इसके और भी काम है .
जैस :

  • Data security : Data को corrupt होने से बचाना।
  • Device Security : बिना permission के किसी भी प्रोग्राम का डिवाइस को इस्तमाल करने से रोकना।
  • User पासवर्ड security : passwords को encrypt करके स्टोर करना ताकि कोई भी प्रोग्राम उसे आसानी से न पढ़ सके।

अब हमको ये तो समझ आ गया की Operating System क्या है ?
चलिए अब इसके Types के बारे में जानते है।

Operating System के प्रकार

Operating System अलग अलग प्रकार के होते है ये उनके यूसेज और Technology में बदलाव के आधार पर तय किया गया है।

  1. Batch Operating System
  2. Time Sharing Operating System
  3. Distributed Operating System
  4. Network Operating System
  5. Real Time Operating System
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1. Batch Operating system

इस तरह का ऑपरेटिंग सिस्टम सीधे तोर पे कंप्यूटर से interact नहीं होता। इसमें OS को मिलने वाली Jobs को batch wise बाट दिया जाता है और ये Batch CPU को काम करने का निर्देश देते है।

Jobs : कंप्यूटर को दिए जाने वाले Program , Command , या instructions को Jobs बोलते है।

Batch Operating System के फायदे

  • वैसे तो JOB पूरी कब होगी ये अंदाज़ा लगाना भी मुश्किल है पर Batch System के Processor को पता होता है की Queue में JOB कितना टाइम लेगी।
  • इसमें बहुत सारे user एक साथ Batch को शेयर कर सकते है।
  • Batch System में आने वाले काम को बार बार manage करना आसान है।

Batch Operating System के नुकसान

  • कंप्यूटर ऑपरेटर को Batch System में काम करने के लिए उसकी की अच्छी खासी जानकारी होना जरुरी है
  • Batch System में कमी को ढूंढ़ना बहुत ही मुश्किल है।
  • जब तक एक Job पूरी नहीं होती तब तक दूसरी job Working में नहीं आ सकती। फिर चाहे उसे कितना भी समय लगे।
  • किसी भी jobs के विफल जाने पर queue में लगी दूसरी jobs को अनिश्चित काल के लिए इंतज़ार करना पड़ सकता है।
  • ये कभी कभी बहुत महंगी पड़ती है।

Batch System पर आधारित कुछ उदहारण : Payroll System, Bank Statements etc.

2. Time Sharing Operating System

Time Sharing System जिसको Multitasking Operating System के नाम से भी जाना जाता है।

हर task को पूरा होने के लिए CPU कुछ समय निर्धारित किआ जाता है ताकि वो Smoothly पूरा हो सके।
इसका अर्थ यह हुआ की इसमें कोई भी टास्क एक साथ नहीं होता बल्कि उसको CPU का छोटे छोटे अंतराल का समय दे दिए जाता है।

Time sharing Operating system के फायदे

  • हर टास्क को बराबर Opportunity मिलती है।
  • इसमें CPU के Idle टाइम को काम किआ जा सकता है।
  • इसमें सॉफ्टवेयर के duplication के अवसर बहुत ही काम हो जाते है।

Time sharing Operating system के नुकसान

  • विश्वसनीयता की समस्या
  • इसमें User के program और Data की Security का ध्यान रखना होता है।
  • Data से कम्युनिकेशन में समस्या आ सकती है।

Examples of Time-Sharing OS are: Multics, Unix etc.

3. Distributed Operating System

इस तरह के ऑपरेटिंग सिस्टम बहुत तेज़ी के साथ कंप्यूटर Technology की दुनिया में उन्नति कर रहे है। और इसको उतनी ही तेज़ी के साथ दुनिया भर में स्वीकारा भी जा रहा है।

इसमें एक ही ऑपरेटिंग सिस्टम के जरिए कए सारी machine को मैनेज किया जाता है , और जिसका सबसे बड़ा फायदा ये है की अगर किसी यूजर के कंप्यूटर में कोई files नहीं भी है तो वो दूसरे कंप्यूटर से आसानी से Access क्र सकता है।
इसका सबसे ज्यादा उपयोग वहा किआ जाता है जहा पर कई सारे users को एक ही टास्क पे काम करना हो।
जैसे Software Development इत्यादि।

Distributed Operating System के फायदे

  • यहां पे किसी भी सिस्टम में आयी कमी के कारन किसी भी दूसरे सिस्टम के काम पर असर नहीं पड़ता क्युकी सब पूरी तरह से स्वतंत्र है।
  • Email डाटा Exchange की स्पीड को बड़ा देते है।
  • चुकी Resources को साझा किआ जा रहा है इसलिए Calculation बहुत तेज़ सटीक और durable हो गयी है।
  • जो main या Host कंप्यूटर है उसपर Load कम हो गया है।
  • इस तरह के सिस्टम का विस्तार करना भी काफी ज्यादा आसान है।
  • डाटा processing में होने वाली देरी को भी घटाया जा रहा है।

Distributed Operating System के नुकसान

  • main या होस्ट कंप्यूटर में आयी कमी पुरे सिस्टम को ठप कर सकती है।
  • Distributed System को उसे करने के लिए जो language इस्तमाल की जाती है उसे अभी तक परिभाषित नहीं किआ गया है।
  • इस तरह के सिस्टम काफी ज्यादा महंगे हो सकते है और साथ ही इनके software को समझना और उसमे काम करना काफी मुश्किल हो जाता है।
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Example : LOCUS etc.

4. Network Operating System

इस तरह के ऑपरेटिंग सिस्टम एक Server पर चलते है जो data, users, groups, security, applications, और दूसरे network function को मैनेज करने की क्षमता प्रदान करते है। इस तरह के OS files, printers, security, applications, और दूसरे networking device को एक प्राइवेट नेटवर्क में साझा करने में मदद करते है ।

क्योंकी इस तरह के सिस्टम पूरी तरह एक दूसरे से connected रहते है इसलिए इन्हे tightly coupled systems भी कहा जाता है।

Network Operating System के फायदे

  • बहुत ज्यादा स्थिर और Centralized server .
  • सारे security issue को Server के माध्यम से नियंत्रित किया जाता है।
  • नयी Technology या किसी भी हार्डवेयर का integration काफी ज्यादा आसान हो जाता है।
  • Server को किसी दूसरे स्थान से और अलग तरह के Operating system से भी नियंत्रित करना आसान हो जाता है।

Network Operating System के नुकसान

  • इस तरह के server महंगे पड़ते है।
  • ज्यादातर बड़े कार्यो के लिए User को Centralized Server पर निर्भर रहना पड़ता है।
  • इसकी देखरेख और बदलाव का ध्यान हमेशा रखना पड़ता है।
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Example : Microsoft Server 2003, MS Server 2008, Ms Server 2012, MS Server 2016, Red Hat Server , Windows Server 2000 etc.

5. Real Time Operating System

इस तरह के Real Time OS में , कोई भी Process करने और उसके लिए Respond करने के लिए बहुत ही काम समय मिलता है। और इसी समय अंतराल को Response Time कहा जाता है।

Real Time सिस्टम को तब इस्तमाल किया जाता है जहा पर बिलकुल समय पे काम करना अनिवार्य होता है।
जैसे Missile System , Traffic Control इत्यादि।

Real Time System दो तरह के होते है

Hard Real-Time Systems: इस तरह के ऑपरेटिंग सिस्टम में बहुत ही ज्यादा सख्ताई होती है , इसमें मिले हुए Task में बिलकुल भी देरी Acceptable नहीं है।
इस तरह के OS कई जगह इस्तेमाल किए जाते है जैसे Automatic Parachute और Air Bags (जो Accident के समय पे अपने आप खुल जाए ) इत्यादि।

Soft Real-Time Systems: ये OS वहा इस्तमाल किए जाते है जहा समय की कमी काम सख्त है।

Real Time Operating System के फायदे

  • अधिकतम खपत: उपकरणों और System का अधिकतम उपयोग करने से सभी Resource अचे रिजल्ट देते है।
  • Task Shifting : इसमें टास्क को Shift करने का समय किसी भी OS के मुकाबले सबसे कम लगता है।
  • Application पर Focus: इसमें जो भी Application Current टाइम पे चल रही होती है उस पर ज्यादा ध्यान दिए जाता है बजाए Queue में किसी दूसरी एप्लीकेशन पर।
  • Error Free: इस तरह के ऑपरेटिंग सिस्टम पूरी तरह से Error Free होते है।
  • Memory Allocation: मेमोरी का Management इस तरह के OS में सबसे अच्छी तरह से किया जाता है।

Real Time Operating System के नुकसान

  • Limited Tasks: इसमें एक ही समय में बहुत ही काम टास्क को Perform किया जा सकता है।
  • Use heavy system resources: कई बार सिस्टम इतने अच्छे नहीं होते और वो महंगे भी होते है।
  • Complex Algorithms: इसमें काम करने के लिए इस्तमाल होने वाला Algorithim को समझना और उसमे काम करना बहुत ज्यादा कठिन है।

Example : Scientific experiment, weapon systems, air traffic control systems, etc.

Review

दोस्तों उम्मीद करता हु की आपको आपके सवाल का जवाब मिल गया होगा की ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है और इसके प्रकार ? आपको ये आर्टिकल कैसा लगा जरूर बताना। और अगर आपका कोई सवाल हो तो आप निचे कमेंट करके पूछ सकते है।

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Admin
Abhimanyu Vaishnavhttps://qualitybaba.com/
Abhimanyu Vaishnav 2015 से कंप्यूटर साइंस टीचर हैं, वह मार्केटिंग, सेल्स एक्सपर्ट है और साथ ही डिजिटल मार्केटिंग, ब्लॉग्गिंग और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट में उनकी अच्छी पकड़ है। अभिमन्यु का लक्ष्य सभी को आसान भाषा में तकनीकी ज्ञान प्रदान करना है ।
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