Operating System Services: सिस्टम के सबसे महत्वपूर्ण सेवाएं कैसे काम करती हैं?

ऑपरेटिंग सिस्टम सॉफ्टवेयर का एक Part है जो User और कंप्यूटर के हार्डवेयर के बीच Interface होता है। यह एक प्रोग्राम है जो हमें विभिन्न प्रकार के प्रोग्राम Execute करने देता है। यह एकमात्र ऐसा Application है जो लगातार चलता रहता है। अन्य प्रोग्रामों को Smooth Way से चलाने के लिए किसी भी कंप्यूटर के लिए एक ऑपरेटिंग सिस्टम एक Condition है, जिसके बिना Computer को Run करना नामुमकिन है। विभिन्न User के लिए, OS यह Managed करता है कि Hardware और Applications सॉफ़्टवेयर का उपयोग कैसे किया जाता है। यह एक ढांचा प्रदान करता है जिस पर अन्य एप्लिकेशन प्रोग्राम संचालित हो सकते हैं। एक कंप्यूटर सिस्टम का Operating System Services का एक Collection है जो उस पर चलता है और Right Operation को सक्षम बनाता है। यह Files, Programs, इनपुट-आउटपुट डिवाइसों आदि को Manage करता है।

Services of Operating System

Computer को run होने के लिए Operating System Services की जरूरत होती जिन्हे हम आगे विस्तार से जानेगे जैसे Program Execution, Input-Output Operations, File Management, Memory Management, Process Management इत्यादि ।

Operating System की Services क्या है ?

ऑपरेटिंग सिस्टम की निम्नलिखित Services है जैसे :

  1. Program execution
  2. Input Output Operations
  3. Communication between Process
  4. File Management
  5. Memory Management
  6. Process Management
  7. Security and Privacy
  8. Resource Management
  9. User Interface
  10. Networking
  11. Error handling
  12. Time Management
Operating System की Services क्या है ?

आईए सभी को विस्तार से जानते है :-

Program Execution

ऑपरेटिंग सिस्टम यह नियंत्रित करने का in charge है कि किसी प्रोग्राम को कैसे चलाया जाता है। प्रोग्राम को मेमोरी में लोड करने के बाद Execute किया जाता है। CPU Scheduling Algorithm यह निर्धारित करते हैं कि कौन सा कार्य किस क्रम में किया जाता है। यहां कुछ हैं: SJF, FCFS, आदि। ऑपरेटिंग सिस्टम Impasse का Manage करता है, या ऐसी स्थिति जहां प्रोग्राम चलने के दौरान कोई भी दो Processes एक साथ Execute करने का प्रयास नहीं करती हैं। सिस्टम और User Program दोनों को सही से चलते रहना होता है और यह ऑपरेटिंग सिस्टम की जिम्मेदारी है। ऑपरेटिंग सिस्टम सभी प्रकार के कार्यों के Smoothly संचालन को सक्षम करने के लिए विभिन्न प्रकार के Resources का उपयोग करता है।

आइए ऑपरेटिंग सिस्टम (OS) सेवाओं में प्रोग्राम निष्पादन (Program execution) को एक दिलचस्प तरीके से समझते हैं. कल्पना कीजिए कि आपका कंप्यूटर एक Busy रेस्टोरेंट है और आप इसके मालिक हैं,

जब आप कोई प्रोग्राम चलाते हैं, तो यह रेस्टोरेंट में एक नए ग्राहक की तरह होता है। ऑपरेटिंग सिस्टम, जो रेस्टोरेंट का मैनेजर है, ये कार्य करता है:

  1. आर्डर लेना (Loading): सबसे पहले, मैनेजर (OS) ग्राहक (Program) से ऑर्डर लेता है। यह प्रोग्राम को हार्ड डिस्क (रेस्टोरेंट की रसोई) से मेन मेमोरी (रेस्टोरेंट की टेबल) में लोड करके करता है। मेन मेमोरी (Main Memory) वह जगह है जहां प्रोग्राम के निर्देशों को जल्दी से इस्तेमाल किया जा सकता है।
  2. सामग्री इकट्ठा करना (Allocating Resources): अब, मैनेजर यह सुनिश्चित करता है कि ग्राहक के ऑर्डर को पूरा करने के लिए आवश्यक सभी चीजें उपलब्ध हों। उदाहरण के लिए, प्रिंटर की जरूरत हो सकती है (रेस्टोरेंट में ओवन), फाइल तक पहुंच हो सकती है (रेस्टोरेंट के स्टोररूम से सामग्री प्राप्त करना), या नेटवर्क कनेक्शन की आवश्यकता हो सकती है (फोन ऑर्डर लेना)।
  3. खाना बनाना (Execution): एक बार सामग्री इकट्ठी हो जाने के बाद, रसोइया (CPU) प्रोग्राम के निर्देशों का पालन करना शुरू कर देता है। यह वही है जिसे हम प्रोग्राम निष्पादन (Execution) कहते है। रसोइया (CPU) कदम दर कदम निर्देशों का पालन करता है, ठीक वैसे ही जैसे प्रोग्राम करता है।
  4. ऑर्डर पूरा करना (Providing Results): अंत में, रसोइया खाना बना लेता है (प्रोग्राम अपना काम पूरा कर लेता है) और मैनेजर (OS) इसे ग्राहक (आप) तक पहुंचाता है। आप या तो सीधे परिणाम देख सकते हैं (स्क्रीन पर आउटपुट) या किसी फाइल में सहेज सकते हैं (बचे हुए भोजन को पैक करना)।
  5. मेज साफ करना (Cleaning Up): जब आप खाना खा लेते हैं (प्रोग्राम पूरा हो जाता है), तो मैनेजर टेबल साफ कर देता है (मेमोरी खाली कर देता है) ताकि अगला ग्राहक बैठ सके (दूसरा प्रोग्राम चल सके)।

इस तरह से ऑपरेटिंग सिस्टम यह सुनिश्चित करता है कि आपके कंप्यूटर पर प्रोग्राम सुचारू रूप से चलते रहें!

Input Output Operations

ऑपरेटिंग सिस्टम (OS) हमारे कंप्यूटर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसे आप कंप्यूटर का दिमाग समझ सकते हैं। यह कई तरह के काम करता है, उन्हीं में से एक है इनपुट आउटपुट (Input Output) ऑपरेशन को मैनेज करना।

आसान भाषा में समझें तो इनपुट वो चीजें हैं जो हम कंप्यूटर को देते हैं, जैसे माउस से क्लिक करना, कीबोर्ड से टाइप करना या माइक्रोफोन में बोलना। वहीं आउटपुट वो है जो कंप्यूटर हमें दिखाता है, जैसे मॉनिटर पर तस्वीरें या वीडियो, प्रिंटर से निकलता हुआ पेपर या स्पीकर से आवाज़।

Services of Operating System

अब ऑपरेटिंग सिस्टम का काम इन दोनों के बीच का संचार सेतु बनना है। यह इनपुट डिवाइस (माउस, कीबोर्ड आदि) से मिलने वाली जानकारी को समझता है और फिर उसे प्रोसेस कर आउटपुट डिवाइस (मॉनिटर, प्रिंटर आदि) को बताता है कि क्या दिखाना है या क्या करना है।

उदाहरण के लिए, जब आप कीबोर्ड से कोई शब्द टाइप करते हैं, तो यह इनपुट होता है। ऑपरेटिंग सिस्टम इस इनपुट को समझता है और फिर उसे स्क्रीन पर दिखा देता है, जो कि आउटपुट हुआ।

इस तरह से Operating System Services इनपुट आउटपुट ऑपरेशन को मैनेज करके हमारे लिए कंप्यूटर का इस्तेमाल आसान बना देती है।

Communication between Processes

चलिए एक ऑपरेटिंग सिस्टम (OS) के अंदर प्रोग्रामों के बीच Comunication को आसानी से समझते हैं। आप जानते हैं कि आपका कंप्यूटर एक समय में कई कार्य कर सकता है, है ना? यह सब ऑपरेटिंग सिस्टम की वजह से होता है। ऑपरेटिंग सिस्टम कई प्रोग्रामों को चलाने का Manage करता है, जिन्हें हम प्रोसेस कहते हैं।

अब, ये प्रोसेस आपस में जानकारी साझा करने और Coordinate करने में सक्षम होना चाहिए। इसे ही प्रोसेसों के बीच संचार (communication) कहा जाता है। यह उसी तरह है जैसे हम रोज़मर्रा की जिंदगी में बातचीत करते हैं।

क्यों जरूरी है प्रोसेसों के बीच संचार?

कई कार्य करने के लिए प्रोसेसों को अक्सर एक दूसरे पर निर्भर रहना पड़ता है। उदाहरण के लिए, एक वेब ब्राउज़र इंटरनेट से डेटा प्राप्त करने के लिए एक अलग प्रोसेस के साथ Communicate कर सकता है। इस डेटा को प्राप्त करने के बाद, ब्राउज़र इसे आपके लिए Displayed करने के लिए रेंडरिंग इंजन नामक किसी अन्य प्रोसेस के साथ Communications कर सकता है।

कैसे होता है प्रोसेसों के बीच संचार?

Operating System Services विभिन्न तरीके प्रदान करता है जिससे प्रोसेस संचार कर सकते हैं। ये तरीके कुछ इस तरह हैं:

  • साझा मेमोरी (Shared Memory): यह ऐसी है जैसे दो लोगों के बीच एक व्हाइटबोर्ड हो। एक प्रोसेस व्हाइटबोर्ड पर लिख सकता है, और दूसरा प्रोसेस वही जानकारी पढ़ सकता है।
  • पाइप्स (Pipes): ये एकतरफा संचार चैनल होते हैं, मानो एक तरफ से एक नोट पास करना हो। एक प्रोसेस डेटा लिखता है, और दूसरा प्रोसेस इसे पढ़ता है।
  • संदेश पासिंग (Message Passing): यह ऐसे है जैसे दोस्तों को चिट्ठियाँ भेजना। एक प्रोसेस संदेश भेजता है, और दूसरा प्रोसेस उसे प्राप्त करता है।

कौन सी विधि सबसे अच्छी है यह इस बात पर निर्भर करता है कि प्रोसेस किस प्रकार का संचार करना चाहते हैं।

अंत में, प्रोसेसों के बीच संचार एक ऑपरेटिंग सिस्टम के सुचारू रूप से चलने के लिए महत्वपूर्ण है। यह विभिन्न कार्यक्रमों को एक साथ काम करने और जटिल कार्यों को पूरा करने की अनुमति देता है।

File Management

File Management को ऑपरेटिंग सिस्टम द्वारा भी सहायता मिलती है। जब कोई प्रोग्राम Request करता है तो ऑपरेटिंग सिस्टम किसी फ़ाइल तक पहुंच प्रदान करता है। इन Rights में Reading-Writing, Only-Reading आदि शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, यह एक प्लेटफ़ॉर्म प्रदान करता है जहाँ Users फ़ाइलें Create और Delete कर सकते हैं। ऑपरेटिंग सिस्टम यह तय करने का Incharge है कि विभिन्न प्रकार के डेटा और फ़ाइलों को कहाँ Collect किया जाए, जैसे कि पेन ड्राइव, हार्ड ड्राइव या फ़्लॉपी डिस्क पर फ़ाइलें। ऑपरेटिंग सिस्टम डेटा Manipulation और Storage के बारे में निर्णय लेता है।

Operating System Services

ऑपरेटिंग सिस्टम की फाइल मैनेजमेंट को हम कैसे समझ सकते हैं?

  • अलमारियां और दराज = फोल्डर (Folders): ऑपरेटिंग सिस्टम फोल्डर बनाता है, जो आपके कंप्यूटर पर डिजिटल अलमारियों और दराजों की तरह काम करते हैं। आप इन फोल्डरों में अपनी फाइल्स को व्यवस्थित कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, आप एक फोल्डर “दस्तावेज़” (Documents) बना सकते हैं और उसमें अपने सभी Word फाइल्स, pdf फाइल्स आदि रख सकते हैं।
  • लेबल = फाइल नेम (File Name): ऑपरेटिंग सिस्टम हर फाइल को एक नाम देता है, जिसे फाइल नेम कहा जाता है। यह लेबल की तरह होता है, जो आपको बताता है कि फाइल में क्या है। उदाहरण के लिए, आपकी रिपोर्ट का नाम “मुंबई_सेल्स_रिपोर्ट.docx” (Mumbai_Sales_Report.docx) हो सकता है।
  • सामान का ट्रैक रखना = फाइल की जानकारी (File Information): ऑपरेटिंग सिस्टम हर फाइल के बारे में कुछ जानकारी रखता है, जैसे उसका आकार (size), किस तिथि को बनाई गई (created date) और किस प्रकार की फाइल है (file type)। यह जानकारी उसी तरह है जैसे आप याद रखते हैं कि आपने कौन सी चीज़ किस अलमारी में रखी है।
  • खोजना आसान = फाइल सर्च (File Search): ऑपरेटिंग सिस्टम आपको फाइलों को खोजने की सुविधा देता है। आप फाइल नेम या उसमें मौजूद किसी टेक्स्ट के आधार पर सर्च कर सकते हैं। यह उसी तरह है जैसे आप अपने घर में किसी चीज़ को ढूंढने के लिए याद करते हैं कि आपने उसे आखिर किस कमरे में रखा था।

ऑपरेटिंग सिस्टम की फाइल मैनेजमेंट हमारे लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

अच्छी फाइल मैनेजमेंट हमारे कंप्यूटर को व्यवस्थित रखने में मदद करती है। फाइलें आसानी से ढूंढी जा सकती हैं और खोने का खतरा कम हो जाता है। साथ ही, फाइलों को मैनेज करने में लगने वाला समय भी बचता है।

Memory Management

Operating System Services में मेमोरी प्रबंधन (Memory Management) को आसान शब्दों में समझते हैं.

कंप्यूटर में दो तरह की मेमोरी होती है:

  • रैम (RAM): यह तीव्र गति वाली मेमोरी होती है जो अस्थायी रूप से डाटा को स्टोर करती है, कंप्यूटर जब चालू रहता है तब रैम का इस्तेमाल चल रहे प्रोग्रामों और उनके द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे डाटा को रखने के लिए किया जाता है। जब कंप्यूटर बंद हो जाता है, तो रैम में रखा गया डाटा मिट जाता है।
  • हार्ड डिस्क (Hard Disk): यह स्थायी मेमोरी होती है जो डाटा को लंबे समय तक स्टोर कर सकती है, भले ही कंप्यूटर बंद हो जाए। रैम की तुलना में हार्ड डिस्क धीमी होती है।

मेमोरी प्रबंधन का काम रैम को कुशलतापूर्वक इस्तेमाल करना है। इसमें कई चीज़ें शामिल हैं:

  • मेमोरी को आवंटित करना (Allocate Memory): रैम एक सीमित संसाधन है, मेमोरी प्रबंधन यह तय करता है कि कब और कितनी रैम किसी प्रोग्राम को दी जाए।
  • मेमोरी को ट्रैक रखना: मेमोरी प्रबंधन हर समय रैम के किस हिस्से का इस्तेमाल हो रहा है और कौन सा हिस्सा खाली है, इस पर नज़र रखता है।
  • मेमोरी को खाली कराना: जब कोई प्रोग्राम खत्म हो जाता है, तो मेमोरी प्रबंधन उस प्रोग्राम द्वारा इस्तेमाल की जा रही रैम को खाली करा देता है ताकि दूसरे प्रोग्राम उसे इस्तेमाल कर सकें।
  • वर्चुअल मेमोरी: रैम कभी-कभी अपर्याप्त (Insufficient) हो सकती है, वर्चुअल मेमोरी (Virtual RAM) एक ऐसी तरकीब है जिसका इस्तेमाल करके ऑपरेटिंग सिस्टम रैम के साथ हार्ड डिस्क की जगह का भी इस्तेमाल कर सकता है, यह प्रोग्राम को ऐसा लगता है कि उनके पास रैम से कहीं ज्यादा बड़ी मेमोरी उपलब्ध है।

अगर मेमोरी प्रबंधन ना हो, तो कंप्यूटर प्रोग्रामों को चलाने में परेशानी का सामना करेगा, उदाहरण के लिए, रैम भर जाने पर नए प्रोग्राम नहीं चल पाएंगे, साथ ही, अगर कोई प्रोग्राम अपनी आवंटित रैम से ज्यादा जगह इस्तेमाल करने की कोशिश करे, तो इससे सिस्टम क्रैश भी हो सकता है।

इसलिए, मेमोरी प्रबंधन एक महत्वपूर्ण सेवा है जो कंप्यूटर को सुचारू रूप से चलाने में मदद करती है।

Process Management

आपके कंप्यूटर पर एक समय में कई सारे प्रोग्राम चल रहे हैं, जैसे कोई गाना सुन रहा है, कोई इंटरनेट ब्राउज़ कर रहा है, कोई भी डॉक्यूमेंट लिख रहा है। ये सभी काम अलग-अलग प्रोग्राम चलाकर किए जा रहे हैं, लेकिन, कंप्यूटर का प्रोसेसर (CPU) एक समय में सिर्फ एक ही काम कर सकता है। तो फिर ये सारे काम कैसे चलते रहते हैं? यही प्रोसेस मैनेजमेंट का काम है!

प्रोसेस मैनेजमेंट क्या है?

प्रोसेस मैनेजमेंट Operating System की वो Service है जो कंप्यूटर के प्रोसेसर और अन्य संसाधनों (जैसे मेमोरी, स्टोरेज) को कई प्रोग्राम्स के बीच मैनेज करती है। इसे आसान भाषा में यूं समझ सकते हैं – ये एक ट्रैफिक पुलिसकर्मी की तरह है जो सड़क (प्रोसेसर) पर ट्रैफिक (प्रोग्राम्स) को व्यवस्थित रखता है।

प्रोसेस मैनेजमेंट क्या करती है?

  • प्रोसेस क्रिएशन (Process Creation): जब आप कोई प्रोग्राम चलाते हैं, तो ऑपरेटिंग सिस्टम उसके लिए एक प्रोसेस बनाता है.
  • प्रोसेस शेड्यूलिंग (Process Scheduling): ऑपरेटिंग सिस्टम ये तय करता है कि कौनसा प्रोग्राम प्रोसेसर का इस्तेमाल करेगा और कब करेगा। ये एक तयशुदा नियम या प्रोसेसर को जरूरत के हिसाब से भी हो सकता है।
  • प्रोसेस सिंक्रोनाइजेशन (Synchronization):  कभी-कभी कई प्रोग्राम एक साथ एक ही फाइल या संसाधन का इस्तेमाल करना चाहते हैं, प्रोसेस मैनेजमेंट ये सुनिश्चित करता है कि वो आपस में टकराए नहीं।
  • प्रोसेस टर्मिनेशन (Termination): जब आप कोई प्रोग्राम बंद कर देते हैं, तो ऑपरेटिंग सिस्टम उससे जुड़े प्रोसेस को खत्म कर देता है और उसकी मेमोरी और अन्य संसाधन वापस ले लेता है।

इसका फायदा क्या है?

प्रोसेस मैनेजमेंट की वजह से आप एक साथ कई प्रोग्राम चला सकते हैं और कंप्यूटर का पूरा फायदा उठा सकते हैं, साथ ही, ये आपके कंप्यूटर को स्थिर और सुरक्षित रखने में भी मदद करता है।

Security and Privacy

ऑपरेटिंग सिस्टम (OS) आपके कंप्यूटर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो सब कुछ नियंत्रित करता है। यह आपके डाटा और फाइल्स को सुरक्षित रखने में भी अहम भूमिका निभाता है।

सुरक्षा (Security): ज़रा कल्पना करें आपके घर में ताला लगा हो। ऑपरेटिंग सिस्टम का सुरक्षा उसी ताले की तरह है। यह आपके कंप्यूटर को बाहरी खतरों से बचाता है। ये खतरे वायरस, (Worms), और हैकर्स हो सकते हैं जो आपकी जानकारी चुरा सकते हैं या आपके कंप्यूटर को नुकसान पहुँचा सकते हैं।

ऑपरेटिंग सिस्टम सुरक्षा कैसे करता है?

  • पासवर्ड: लॉग इन करने के लिए पासवर्ड का इस्तेमाल अनधिकृत लोगों को सिस्टम से दूर रखता है।
  • अनुमतियाँ (Permissions): हर यूज़र को अलग-अलग अनुमतियां दी जा सकती हैं। जिससे कोई यूज़र आपके फाइल्स को न देख सके या बदल न सके।
  • एंटी-वायरस सॉफ्टवेयर: ऑपरेटिंग सिस्टम अक्सर एंटी-वायरस सॉफ़्टवेयर के साथ आते हैं। ये सॉफ्टवेयर वायरस और Worms को आपके सिस्टम में घुसने से रोकते हैं। जैसे windows का defender दिखाई देगा।
Security and Privacy of OS

गोपनीयता (Privacy): गोपनीयता का मतलब है कि आपकी जानकारी निजी रहे। ऑपरेटिंग सिस्टम आपकी जानकारी को सुरक्षित रखने में भी मदद करता है।

  • एन्क्रिप्शन (Encryption): आप अपनी फाइल्स को Encrypt कर सकते हैं। Encryption एक प्रकार का कोड होता है जो आपकी फाइल को पढ़ने लायक बनाता है, सिर्फ उसी के लिए जिसके पास पासवर्ड या स्पेशल कोड हो।

आप अपनी गोपनीयता बनाए रखने के लिए क्या कर सकते हैं?

  • मजबूत पासवर्ड बनाएं और उन्हें नियमित रूप से बदलते रहें।
  • अज्ञात स्रोतों से सॉफ्टवेयर डाउनलोड न करें।
  • सार्वजनिक वाई-फाई का इस्तेमाल करते समय सावधान रहें।
  • ऑपरेटिंग सिस्टम और एंटी-वायरस सॉफ्टवेयर को अपडेट रखें।

यह कुछ आसान तरीके हैं जिनसे आप अपने ऑपरेटिंग सिस्टम को सुरक्षित और अपनी जानकारी को गोपनीय रख सकते हैं।

Resource Management

कंप्यूटर में कई संसाधन (resources) होते हैं, जैसे:

  • CPU (Central Processing Unit): वह दिमाग है जो निर्देशों को पूरा करता है।
  • मेमोरी (RAM): यह कार्यशील डेटा को अस्थायी रूप से संग्रहीत करता है।
  • हार्ड डिस्क (HDD/SSD): यह स्थायी रूप से डेटा को स्टोर करता है।
  • प्रिंटर, स्कैनर, वेब कैमरा जैसे बाह्य उपकरण (Input/Output Devices)

ये संसाधन सीमित हैं, यानि सभी प्रोग्राम इन्हें एक साथ इस्तेमाल नहीं कर सकते। ऑपरेटिंग सिस्टम एक मैनेजर की तरह काम करता है जो यह सुनिश्चित करता है कि सभी प्रोग्रामों को इन संसाधनों का कुशलतापूर्वक उपयोग करने के लिए वे मिले।

resource management के कुछ मुख्य कार्य हैं:

  • प्रक्रिया प्रबंधन (Process Management): चल रहे प्रोग्रामों को CPU टाइम, मेमोरी जैसी चीज़ें देना।
  • स्मृति प्रबंधन (Memory Management): यह तय करना कि कौनसा प्रोग्राम मेमोरी का उपयोग कर सकता है और कितना उपयोग कर सकता है।
  • इनपुट/आउटपुट (Input/Output) प्रबंधन: यह External उपकरणों तक पहुंच का Manage करता है, यह सुनिश्चित करता है कि प्रोग्राम एक दूसरे के रास्ते में न आएं।

इस Manage के कारण कंप्यूटर सुचारु रूप से चलता है और हर प्रोग्राम को अपना काम करने के लिए आवश्यक Resource मिल पाते हैं।

Operating System  Resource Managerq

कुछ उदाहरणों से इसे और समझा सकते हैं:

  • मान लीजिये आप एक प्रोग्राम पर काम कर रहे हैं और कोई गेम खेल रहे है। ऑपरेटिंग सिस्टम यह सुनिश्चित करेगा कि CPU दोनों प्रोग्रामों को समय दे ताकि दोनों चलते रहें।
  • आप एक वेब पेज खोल रहे हैं। ऑपरेटिंग सिस्टम वेब ब्राउज़र को मेमोरी आवंटित करेगा ताकि वह पेज को लोड कर सके।

मुख्य बात यह है कि resource management यह सुनिश्चित करता है कि कंप्यूटर पर चल रहे सभी प्रोग्रामों को आवश्यक संसाधन मिलें, जिससे आप अपना काम कुशलतापूर्वक कर सकें।

Operating System Services का Resource Management एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिससे Operating System आसानी से कंप्युटर मे मोजूद किसी भी resource को दूसरे प्रोग्राम के लिए Available कर देता है ।

User Interface

ऑपरेटिंग सिस्टम (OS) के लिए यूजर इंटरफेस (UI) को ऐसे समझें: यह वो माध्यम है जिससे आप अपने कंप्यूटर को निर्देश देते हैं। ठीक वैसे ही जैसे आप किसी से बातचीत करते हैं, वैसे ही UI के ज़रिए आप कंप्यूटर को कार्य करने के लिए कहते हैं.

Operating System

अलग-अलग तरह के UI होते हैं, जिनमें से दो मुख्य प्रकार हैं:

  • ग्राफ़िकल यूजर इंटरफेस (GUI): इसे आप ग्राफ़िकल दस्तावेज़ के रूप में समझ सकते हैं, इसमें आपको आइकॉन (Icon) दिखाई देते हैं, जो छोटे चित्र होते हैं और किसी प्रोग्राम या फाइल को दर्शाते हैं। आप माउस की मदद से इन आइकॉन पर क्लिक करके प्रोग्राम चला सकते हैं। इसके अलावा, मेन्यू (Menu) होते हैं जिनमें से आप विभिन्न विकल्प चुन सकते हैं, साथ ही टेक्स्ट बॉक्स (Text Box) होते हैं जहां आप सीधे शब्द लिख सकते हैं। विंडोज़ (Windows) और मैक (Mac) ऑपरेटिंग सिस्टम GUI का इस्तेमाल करते हैं।
  • कमांड लाइन इंटरफेस (CLI): यह थोड़ा जटिल है, इसमें आपको सिर्फ टेक्स्ट दिखाई देता है। आप कीबोर्ड की मदद से कंप्यूटर को निर्देश देने के लिए टेक्स्ट टाइप करते हैं। यह तरीका थोड़ा पुराना है लेकिन आज भी कई शक्तिशाली प्रोग्राम CLI का इस्तेमाल करते हैं, लिनक्स (Linux) ऑपरेटिंग सिस्टम में CLI का इस्तेमाल आम है।

सरल शब्दों में, Operating System Service UI (User Interface) एक Translator का काम करता है। आप जो करना चाहते हैं उसे आसान भाषा में UI को बताते हैं और UI उसे कंप्यूटर की भाषा में बदलकर कंप्यूटर को बता देता है।

Networking

ऑपरेटिंग सिस्टम (OS) की Services में नेटवर्किंग सेवाएं उन ज़रूरी चीज़ों में से एक हैं जो आपके कंप्यूटर को दूसरों से जुड़ने और बात करने देती हैं। यह उसी तरह है जैसे दोस्तों का एक समूह एक-दूसरे से बात करने के लिए मिलता है, बस इस मामले में बात करने वाले कंप्यूटर होते हैं!

आइए इसे और आसान बनाते हैं:

  • कल्पना कीजिए कि आपके पास एक कमरे में कई लोग हैं। वे एक-दूसरे से जानकारी साझा करना चाहते हैं, लेकिन वे चिल्ला नहीं सकते क्योंकि यह बहुत शोर होगा।
  • यही वह जगह है जहां नेटवर्किंग आती है। यह एक ऐसी भाषा है जिसे कंप्यूटर समझते हैं और इसका उपयोग एक-दूसरे से संदेश भेजने और प्राप्त करने के लिए करते हैं।
  • ऑपरेटिंग सिस्टम में नेटवर्किंग सेवाएं उस अनुवादक की तरह काम करती हैं जो यह सुनिश्चित करती है कि संदेश सही ढंग से भेजे और प्राप्त किए जाएं। यह कंप्यूटर को इंटरनेट से कनेक्ट करने, फ़ाइलें साझा करने, और अन्य कंप्यूटरों के साथ संचार करने में सक्षम बनाता है।
Computer Networking

नेटवर्किंग सेवाएं कुछ मुख्य चीजें करती हैं:

  • ड्राइवर स्थापित करना: ये ड्राइवर Translator की तरह काम करते हैं, यह सुनिश्चित करते हैं कि आपका नेटवर्क कार्ड (कंप्यूटर का Communication Device) ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ ठीक से काम करता है।
  • इंटरनेट प्रोटोकॉल (IP) Address असाइन करना: यह आपके कंप्यूटर का Address है, नेटवर्क पर एक घर का Address जैसा।
  • डेटा पैकेट भेजना और प्राप्त करना: जानकारी को छोटे टुकड़ों में विभाजित किया जाता है जिन्हें पैकेट कहा जाता है। नेटवर्किंग सेवाएं उन्हें सही कंप्यूटर पर भेजती और प्राप्त करती हैं।

तो, संक्षेप में, ऑपरेटिंग सिस्टम में नेटवर्किंग services कंप्यूटरों को एक-दूसरे से बात करने में मदद करती हैं! उम्मीद है कि यह आपके लिए समझने में आसान था की ऑपरेटिंग सिस्टम की Services Networking का क्या role है!

Error Handling

चलिए Operating System Services में त्रुटि से निपटने (Error Handling) के बारे में सरल हिंदी में समझते हैं।

त्रुटि (Error) क्या है?

कभी-कभी चीजें गलत हो जाती हैं। ऑपरेटिंग सिस्टम के काम करते समय भी त्रुटियां (Error) हो सकती हैं। ये त्रुटियां कई कारणों से हो सकती हैं, जैसे कि हार्ड डिस्क न मिलना, प्रिंटर का कागज खत्म हो जाना, या कोई प्रोग्राम गलत निर्देश देना इत्यादि ।

Error Handling

त्रुटि से निपटना (Error Handling) क्यों ज़रूरी है?

अगर ऑपरेटिंग सिस्टम त्रुटियों (Errors) को न संभाले, तो छोटी सी समस्या भी पूरे कंप्यूटर को क्रैश कर सकती है। त्रुटि (Error) से निपटना यह सुनिश्चित करता है कि सिस्टम स्थिर (stable) रहे और आप अपना काम करते रह सकें।

ऑपरेटिंग सिस्टम Errors को कैसे संभालता है?

ऑपरेटिंग सिस्टम में त्रुटियों को पहचानने और उन्हें ठीक करने के लिए विशेष Tools होते हैं। जब कोई Error होती है, तो ऑपरेटिंग सिस्टम निम्न में से कोई एक कार्य कर सकता है:

  • संदेश प्रदर्शित करना (Show a message): यह आपको बताता है कि क्या गलत हुआ और आप क्या कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, यदि आप किसी फ़ाइल को खोलने का प्रयास करते हैं जो मौजूद नहीं है, तो आपको एक संदेश मिल सकता है जो कहता है “फ़ाइल नहीं मिली”।
  • कार्रवाई का प्रयास करना (Try to fix the error): कुछ मामलों में, ऑपरेटिंग सिस्टम स्वचालित रूप से त्रुटि को ठीक करने का प्रयास कर सकता है। उदाहरण के लिए, यदि आपकी हार्ड डिस्क लगभग भर चुकी है, तो ऑपरेटिंग सिस्टम आपको यह बताने के लिए एक संदेश प्रदर्शित कर सकता है और आपको कुछ जगह खाली करने में मदद करने के लिए सुझाव भी दे सकता है।
  • प्रोग्राम को बंद करना (Close the program): यदि कोई प्रोग्राम बहुत अधिक Error पैदा कर रहा है, तो ऑपरेटिंग सिस्टम उस प्रोग्राम को बंद कर सकता है ताकि यह आपके पूरे कंप्यूटर को क्रैश न कर सके।

Time Management

Operating System Services में समय प्रबंधन (Time Management) के बारे में सरल भाषा में समझते हैं।

कंप्यूटर में एक साथ कई प्रोग्राम चल सकते हैं, है ना? लेकिन CPU (Central Processing Unit) यानि प्रोसेसर तो एक ही होता है। तो सवाल ये उठता है कि आखिर ये सारे प्रोग्राम एक ही प्रोसेसर का इस्तेमाल कैसे करते हैं? यहीँ पे ऑपरेटिंग सिस्टम का समय प्रबंधन (Time Management) Services महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

Operating System Time Management
Time Management
  • समय बँटवारा (Time Sharing): ऑपरेटिंग सिस्टम हर प्रोग्राम को प्रोसेसर का इस्तेमाल करने के लिए छोटे-छोटे टाइम स्लाइस (Time Slice) देता है। ये टाइम स्लाइस मिलीसेकंड (Millisecond) में होते हैं। एक प्रोग्राम अपना टाइम स्लाइस खत्म होने पर दूसरा प्रोग्राम बारी लेता है। इस तरह से देखने में लगता है कि सभी प्रोग्राम एक साथ चल रहे हैं।
  • प्राथमिकता (Priority): कुछ प्रोग्राम दूसरों से ज्यादा जरूरी होते हैं, जैसे ऑपरेटिंग सिस्टम खुद या कोई एंटीवायरस सॉफ्टवेयर। ऐसे प्रोग्रामों को ऑपरेटिंग सिस्टम ज्यादा टाइम स्लाइस देता है ताकि वो अपना काम जल्दी पूरा कर सकें।
  • समय मापन (Time Measurement): ऑपरेटिंग सिस्टम ये भी ट्रैक रखता है कि हर प्रोग्राम कितना समय प्रोसेसर का इस्तेमाल कर चुका है। इससे उसे पता चलता है कि किस प्रोग्राम को आगे चलने का मौका देना है।

इस तरह से Time Management करके ऑपरेटिंग सिस्टम सुनिश्चित करता है कि सारे प्रोग्राम सुचारू रूप से चल सकें और हमें एक साथ कई काम करने का अनुभव मिले।

कुछ अतिरिक्त जानकारी:

  • ये टाइम स्लाइस बहुत छोटे होते हैं, इसलिए हमें ऐसा लगता है कि सभी प्रोग्राम एक साथ चल रहे हैं।
  • आपने कभी देखा होगा कि कोई प्रोग्राम अचानक धीमा चलने लगता है। ऐसा तब हो सकता है जब उस प्रोसेसर के लिए दूसरा कोई प्रोग्राम ज्यादा टाइम स्लाइस ले रहा हो।

Short Summary on Services of Operating System

निचालन तंत्र सेवाएं (Operating System Services) कंप्यूटर को चलाने के लिए जरूरी होती हैं। ये सेवाएं कंप्यूटर के हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के बीच में एक सेतु की तरह काम करती हैं.

कुछ महत्वपूर्ण सेवाओं में शामिल हैं:

  • प्रोग्राम निष्पादन (Program Execution): यह ऑपरेटिंग सिस्टम को यह बताता है कि कौन सा प्रोग्राम चलाना है और कब चलाना है।
  • फाइल प्रबंधन (File Management): यह फाइलों को स्टोर करने, एक्सेस करने और मैनेज करने में मदद करता है।
  • स्मृति प्रबंधन (Memory Management): यह कंप्यूटर की रैम मेमोरी को विभिन्न प्रोग्रामों और कार्यों के लिए आवंटित करता है।
  • प्रक्रिया प्रबंधन (Process Management): यह विभिन्न प्रोग्रामों (प्रक्रियाओं) को ट्रैक करता है और सुनिश्चित करता है कि वे कुशलतापूर्वक चल रहे हैं।
  • इनपुट/आउटपुट (Input/Output) प्रबंधन: यह कीबोर्ड, माउस, प्रिंटर आदि बाहरी उपकरणों के साथ संचार को संभालता है।

यह संक्षिप्त सारांश है, मुझे आशा है की मैं आपको यह बताने मे सफल रहा हु की Operating System Services क्या है ओर ये कैसे काम करती है , आपको यह लेख कैसा लगा कमेन्ट करके अवश्य बताए ।

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