XPoSat क्या है ? ISRO Mission 2024

XPoSat क्या है ? ISRO Mission 2024

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एक्सपोसैट (XPoSat) का अर्थ एक्स-रे ध्रुवणमापी उपग्रह है। यह भारत का पहला और दुनिया का केवल दूसरा ध्रुवीय मिशन है जो चरम परिस्थितियों में उज्ज्वल खगोलीय एक्स-रे स्रोतों की विभिन्न गतिशीलता का अध्ययन करने के लिए है।

जहा एक तरफ पूरा भारत नए साल के जाशन मे डूबा था वही दूसरी तरफ ISRO एक बार फिर भारत का सर गर्व से उपर उठाने के लिए अन्तरिक्ष मे एक ओर कीर्तिमान रचने जा रहा है । ISRO 2024 Mission के लिए पूरी तरह तयार है ओर 2024 Indian Space and Research Organization का होगा ।

एक्सपोसैट (XPoSat) का लक्ष्य ब्रह्मांड में एक्स-रे उत्सर्जन के ध्रुवीकरण का अध्ययन करना है। एक्स-रे प्रकाश की एक प्रकार है जो उच्च ऊर्जा वाले इलेक्ट्रॉनों द्वारा उत्सर्जित होती है। एक्स-रे प्रकाश को आमतौर पर ध्रुवित कहा जाता है, जिसका अर्थ है कि यह एक विशिष्ट दिशा में कंपन करता है। एक्स-रे के ध्रुवीकरण का अध्ययन करके, खगोलविद ब्रह्मांड में एक्स-रे उत्पन्न करने वाली प्रक्रियाओं के बारे में अधिक जान सकते हैं।

एक्सपोसैट (XPoSat) में दो वैज्ञानिक पेलोड हैं:

  • POLIX (Polarimeter Instrument in X-rays): यह पेलोड एक्स-रे के ध्रुवीकरण को मापेगा।
  • XSPECT (X-ray Spectroscopy and Timing): यह पेलोड एक्स-रे के स्पेक्ट्रा और समय क्रम को मापेगा।

एक्सपोसैट को 1 जनवरी 2024 को श्रीहरिकोटा से पीएसएलवी-सी58 (PSLV-C58) रॉकेट द्वारा लॉन्च किया गया था। यह उपग्रह पृथ्वी की निचली कक्षा में 650 किलोमीटर की ऊंचाई पर तैनात किया गया है।

एक्सपोसैट (XPoSat) के लक्ष्यों में शामिल हैं:

  • एक्स-रे पल्सर के चुंबकीय क्षेत्रों के बारे में अधिक जानना
  • ब्लैकहोल एक्स-रे बाइनरी के आसपास के वातावरण के बारे में अधिक जानना
  • सुपरनोवा विस्फोटों के बारे में अधिक जानना

एक्सपोसैट के अध्ययन से ब्रह्मांड के बारे में हमारी समझ में महत्वपूर्ण योगदान मिलने की उम्मीद है।

यहां एक्सपोसैट के कुछ विशिष्ट अध्ययनों का विवरण दिया गया है:

  • एक्सपोसैट एक्स-रे पल्सर के चुंबकीय क्षेत्रों के बारे में अधिक जानकारी प्रदान करेगा। एक्स-रे पल्सर उच्च चुंबकीय क्षेत्र वाले तारे हैं जो नियमित रूप से एक्स-रे का उत्सर्जन करते हैं। एक्सपोसैट के अध्ययन से पल्सर के चुंबकीय क्षेत्रों के आकार, आकार और गतिशीलता के बारे में अधिक जानने में मदद मिलेगी।
  • एक्सपोसैट ब्लैकहोल एक्स-रे बाइनरी के आसपास के वातावरण के बारे में अधिक जानकारी प्रदान करेगा। ब्लैकहोल एक्स-रे बाइनरी दो तारे होते हैं, जिनमें से एक एक ब्लैकहोल होता है। एक्सपोसैट के अध्ययन से ब्लैकहोल एक्स-रे बाइनरी के आसपास के वातावरण की संरचना और गतिशीलता के बारे में अधिक जानने में मदद मिलेगी।
  • एक्सपोसैट सुपरनोवा विस्फोटों के बारे में अधिक जानकारी प्रदान करेगा। सुपरनोवा विस्फोट विशाल तारे के विनाश से उत्पन्न होने वाले विस्फोट होते हैं। एक्सपोसैट के अध्ययन से सुपरनोवा विस्फोटों के तंत्र और परिणामों के बारे में अधिक जानने में मदद मिलेगी।

XPoSat Mission की पूरी विडियो :-

पीएसएलवी-सी58, XPoSat Mission

XPoSat Mission भारत के लिए कैसे महताव्पुर्ण है ?

एक्सपोसैट भारत के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण है। सबसे पहले, यह भारत का पहला और दुनिया का केवल दूसरा ध्रुवीय एक्स-रे मिशन है। इस तरह के मिशन ब्रह्मांड के सबसे ऊर्जावान और विस्फोटक खगोलीय घटनाओं का अध्ययन करने के लिए आवश्यक हैं। एक्सपोसैट के सफल लॉन्च से भारत अंतरिक्ष अनुसंधान में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में अपनी स्थिति को मजबूत करता है।

दूसरे, एक्सपोसैट के अध्ययन से ब्रह्मांड के बारे में हमारी समझ में महत्वपूर्ण योगदान मिलने की उम्मीद है। एक्सपोसैट एक्स-रे पल्सर, ब्लैकहोल एक्स-रे बाइनरी और सुपरनोवा विस्फोटों जैसे खगोलीय घटनाओं के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करेगा। यह जानकारी ब्रह्मांड की उत्पत्ति, विकास और चरित्र को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेगी।

तीसरे, एक्सपोसैट भारतीय अंतरिक्ष उद्योग के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। एक्सपोसैट के निर्माण और लॉन्च में भारतीय कंपनियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यह भविष्य में भारत के अंतरिक्ष उद्योग के विकास को बढ़ावा देगा।

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